हमारे देश और समाज में कुछ समस्याए ऐसी हैं जिन पर अधिकतर व्यक्ति या तो मौन रहना उचित समझते हैं या अनभिज्ञ बने रहते हैं या फिर वे चाह कर भी कुछ कर नहीं पाते । ऐसी समस्याओ पर यदि क्षण भर भी कोई आम जन विचार कर ले तो ह्रदय में एक पीड़ा की अनुभूति होती है । यही पीड़ा यदि निरंतर होती रहे तो यह ज्वाला के रूप में प्रज्वलित हो उठती है।